lesser florican

Sypheotides indicus

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Lesser Florican की बुनियादी जानकारी

Scientific NameSypheotides indicus
Status CR गंभीर रूप से संकटग्रस्त
Size46-51 cm (18-20 inch)
Colors
Brown
Black

परिचय

खरमोर (Lesser Florican), जिसे वैज्ञानिक रूप से Sypheotides indicus के नाम से जाना जाता है, बस्टर्ड परिवार का सबसे छोटा और अत्यंत दुर्लभ पक्षी है। यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के घास के मैदानों में पाया जाने वाला एक स्थानिक पक्षी है, जो अपनी विशिष्ट प्रजनन शैली के लिए प्रसिद्ध है।

शारीरिक बनावट

खरमोर की लंबाई लगभग 46 से 51 सेंटीमीटर के बीच होती है। प्रजनन काल के दौरान, नर पक्षी के सिर और गर्दन का रंग गहरा काला हो जाता है और उनके कानों के पीछे विशेष 'कलगी' जैसे पंख निकल आते हैं। इसके विपरीत, मादाएं और गैर-प्रजनन काल के नर भूरे और रेतीले रंग के होते हैं, जो उन्हें घास के मैदानों में छिपने (camouflage) में मदद करते हैं।

प्राकृतिक आवास

यह पक्षी मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत के ऊंचे घास के मैदानों (Grasslands) में पाया जाता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में खरमोर का निवास स्थान है। इन्हें खेती वाले क्षेत्रों और झाड़ियों वाले इलाकों के पास भी देखा जा सकता है।

आहार

खरमोर एक सर्वाहारी पक्षी है। इसके मुख्य आहार में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विभिन्न प्रकार के कीट जैसे टिड्डे और भृंग
  • छोटे मेंढक और छिपकलियाँ
  • पौधों के बीज, कोमल अंकुर और फल

प्रजनन और घोंसला

खरमोर का प्रजनन काल मानसून (जुलाई से सितंबर) के दौरान होता है। इस समय नर पक्षी मादा को आकर्षित करने के लिए घास के मैदानों में ऊंची छलांग लगाते हैं और एक विशेष आवाज निकालते हैं। मादा पक्षी जमीन पर एक उथले गड्ढे में अंडे देती है और उनकी देखभाल स्वयं करती है।

व्यवहार

यह एक बहुत ही शर्मीला और सतर्क पक्षी है। खतरे का आभास होते ही यह ऊंची घास में छिप जाता है। नर खरमोर अपने क्षेत्र को लेकर बहुत रक्षात्मक होते हैं और प्रजनन के मौसम में बहुत सक्रिय रहते हैं।

संरक्षण स्थिति

खरमोर वर्तमान में IUCN की रेड लिस्ट में 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' (Critically Endangered) श्रेणी में है। घास के मैदानों का कम होना, अत्यधिक चराई और शिकार इनकी घटती संख्या के प्रमुख कारण हैं।

रोचक तथ्य

  1. नर खरमोर प्रजनन के दौरान हवा में 1.5 से 2 मीटर तक ऊंची छलांग लगाते हैं, जो देखने में बेहद अद्भुत होता है।
  2. यह बस्टर्ड परिवार का सबसे छोटा सदस्य है।
  3. भारत में इसे स्थानीय भाषा में 'लीख' या 'खरमोर' के नाम से जाना जाता है।
  4. इनकी आबादी अब केवल कुछ ही हजार तक सीमित रह गई है।

पक्षी प्रेमियों के लिए टिप्स

खरमोर को देखने का सबसे अच्छा समय मानसून का मौसम है। पक्षी प्रेमियों को सलाह दी जाती है कि वे शांत रहें और दूरबीन का उपयोग करें, क्योंकि ये पक्षी मानवीय हलचल के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।

निष्कर्ष

खरमोर हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनमोल हिस्सा है। इसके अस्तित्व को बचाने के लिए घास के मैदानों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। हमें इस लुप्तप्राय पक्षी को बचाने के प्रयासों में सहयोग देना चाहिए।

वितरण मानचित्र और क्षेत्र

Official Distribution Data provided by BirdLife International and Handbook of the Birds of the World (2025)